इस दुनियां में कुछ ऐसी भी जगहें है जहाँ किसी की मृत्यु होने पर उसके अंतिम-संस्कार करने के तरीके बड़े ही विचित्र और अजीबो-गरीब होते हैं। कहीं पे मृत व्यक्ति की लाश को टुकड़ों में काटकर उसे गिद्धों को खिलाने की परम्परा है तो कहीं मृत व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए स्ट्रिप डांसर्स की डांस कराने की परम्परा है। कहीं मृत व्यक्ति की लाश के साथ रहने की परम्परा है तो कहीं परिवार के किसी औरत की ऊँगली काटने की प्रथा।

किसी इंसान के मृत्यु होने पर उसका अंतिम-संस्कार (Antim Sanskar) किया जाता है। देश और धर्म के अनुसार प्रत्येक समाज के अंतिम-संस्कार करने का अपना अलग-अलग तरीका होता है।

लेकिन इस दुनियां में कुछ ऐसी भी जगहें है जहाँ किसी की मृत्यु होने पर उसके अंतिम-संस्कार (Strange Antim Sanskar) करने के तरीके बड़े ही विचित्र और अजीबो-गरीब होते हैं। कहीं पे मृत व्यक्ति की लाश को टुकड़ों में काटकर उसे गिद्धों को खिलाने की परम्परा है तो कहीं मृत व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए स्ट्रिप डांसर्स की डांस कराने की परम्परा है। कहीं मृत व्यक्ति की लाश के साथ रहने की परम्परा है तो कहीं परिवार के किसी औरत की ऊँगली काटने की प्रथा।

आइए, देश दुनियां की कुछ ऐसी ही अजब-गजब और विचित्र अंतिम-संस्कारों से जुड़े रीती-रिवाज और परम्पराओं के बारे में विस्तार से जानते हैं-

यहाँ मरने के बाद गिद्धों को खिला देते हैं लाशें (स्काई बुरियल परम्परा) | AJAB GAJAB ANTIM SANSKAR

तिब्बत के बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग मृत व्यक्ति के शरीर को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर उसे गिद्धों को खिला देते हैं। उनके इस परम्परा को स्काई बुरियल  के नाम से जाना जाता है। इस स्काई बुरियल  परंपरा के तहत किसी मृत व्यक्ति की लाश को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटने के लिए समाज का ही कोई आदमी होता है। उस आदमी का यही काम होता है।

इस परंपरा को निभाते वक़्त समाज का ही एक विशिष्ट आदमी उस लाश को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटता है और दूसराविशिष्ट आदमी कटे हुए उन टुकड़ों को जौ के आटे के घोल में डुबो-डुबोकर गिद्धों को खाने के लिए फेंकता है।

लाश के टुकड़ों को गिद्धों के सामने फेंकने के बाद उस मरे हुए आदमी की आत्मा की शांति के लिए उसके परिवार के लोग प्रार्थना करते हैं। प्रार्थना के वक़्त “बुक ऑफ़ द डेथ” का पाठ भी किया जाता है।

इस स्काई बुरियल परम्परा को निभाने के पीछे तिब्बत समाज के बौद्धों का तर्क होता है कि, ऐसा करने से मृत व्यक्ति के शरीर मरने के बाद भी प्रकृति के काम आ जाता है। शरीर तो वैसे भी नष्ट हो जाना है। ऐसा करके कम से कम प्रकृति के किसी जीव का पेट तो भर जाता है। यानि की वो उपयोगिता वाद के सिद्धांत को फॉलो करते हैं।

इस स्काई बुरियल परंपरा का वे एक दूसरा भी यह कारण बताते है कि, गिद्ध जैसे-जैसे उपर आसमान में जाते हैं, वैसे-वैसे वो मृत व्यक्ति की आत्मा भी उपर स्वर्ग में पहुँच जाती है। 

इन लोगों की ऐसी मान्यता है कि, मृत व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए ऐसा करना बहुत जरूरी होता है। अगर ऐसा न किया जाए तो मृत व्यक्ति की आत्मा अशांत होकर इधर-उधर भटकती रहेगी।

यहाँ मृत व्यक्ति की हड्डियों का सूप बनाकर पीने की है परम्परा | Vichitra Antim Sanskar

अमेजन के जंगलों में रहने वाले आदिवासियों की यह परम्परा और भी निराली है। ये लोग मृत व्यक्ति की अंतिम क्रिया कुछ इस तरह से करते हैं कि अच्छे अच्छों का भी दिल दहल जाए।

अंतिम संस्कार की इस परम्परा को निभाते हुए ये लोग मृत व्यक्ति की लाश को पेड़ों की पत्तियों में लपेटकर उसे जंगल में कीड़े-मकोड़ों को खाने के लिए छोड़ देते हैं।

एक महीने का समय बीत जाने पर वे लोग वहां जाकर उस मृत व्यक्ति की हड्डियों को इकठ्ठा करके अपने घर लाते हैं। फिर वे उस हड्डियों का सूप बनाते हैं और उसे पी जाते हैं।

इस विचित्र प्रकार की परम्परा निभाने के पीछे कारण यह बतलाते हैं की, ऐसा करने से मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है।

परिवार की औरतों की ऊँगली काटने का रिवाज है यहाँ 

इंडोनेशिया के दानी आदिवासियों में मृत्यु के बाद व्यक्ति की अंतिम संस्कार की परंपरा और भी खतरनाक है। यहाँ परिवार के सदस्यों को भावनात्मक कष्ट के साथ-साथ शारीरिक कष्ट भी झेलना पड़ता है।

यहाँ जब किसी व्यक्ति कि मृत्यु हो जाती है तब परिवार के किसी औरत को अपनी एक ऊँगली काटनी होती है। ऐसा करके वे मृत व्यक्ति के प्रति अपने दुःख का इजहार करती हैं।

दानी आदिवासी के लोग इस प्रथा को निभाने के पीछे अपना तर्क देते हैं की, ऐसा करने से मृत व्यक्ति की आत्मा को संतुष्टि मिलती है और फिर उनकी कृपा दृष्टि पुरे परिवार पर बनी रहती है।

यहाँ लाश के साथ रहते हैं और उसे खाना भी खिलाते हैं

एक संप्रदाय है टोराजा, जिसको मानने वाले लोग इंडोनेशिया में रहते हैं। इस संप्रदाय के लोग मृत्यु के बाद भी जीवन को मानते हैं। उनकी मान्यता के अनुसार मरे हुए लोग भी जीवित होते हैं।

इंडोनेशिया में टोराजा संप्रदाय के लगभग पांच लाख लोग रहते हैं। यानि की वहां पांच लाख लोग ऐसे हैं जो मुर्दों के साथ सोते हैं और उनके साथ खाना खाते हैं। 

टोराजा संप्रदाय में जब कोई मरता है तब उसकी लाश को सालों तक सड़ने से बचाने के लिए उसे फॉर्मल्डहाइड के घोल से परिरक्षित करते हैं। फिर उस लाश को कब्र में दफन कर देते हैं। 

मृत व्यक्ति की लाश को कब्र में दफनाने से पहले उसके सम्मान में भैंस की बली दी जाती है। फिर उस भैंस की मांस से भोज का आयोजन किया जाता है। बली के बाद मृत व्यक्ति की लाश को अपने घर ले जाते हैं और उसे अनाज घर में कुछ देर के लिए रखा जाता है। फिर कुछ खाने और सिगेरेट के साथ उस लाश को कब्र में दफना दिया जाता है।

फिर एक निश्चित समय के बाद वे उस मृत व्यक्ति की लाश को कब्र से निकालते हैं। वे मृत व्यक्ति की लाश को नए-नए कपड़ों से सजाते हैं, उसके साथ खाना खाते हैं और उसके साथ अपना समय बिताते हैं। वे उस मृत व्यक्ति की यादगार के लिए फोटो खींचते हैं।

ऐसा करने के पीछे उनकी मान्यता है कि मृत्यु के बाद भी जीवन होता है। मृत्यु के बाद जिंदगी का अगला चरण शुरू होता है।

मृत्यु के बाद जानवरों की बली और हड्डियों की पूजा करने की परम्परा है यहाँ 

उत्तरी अमेरिका के वुड्रू जनजाति के लोगों की परम्परा और भी अलग है। किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाने पर उसके अंतिम-संस्कार के तौर पर जानवरों की बली देने की परम्परा है।

जानवरों की बली देने के बाद उनकी हड्डियों की पूजा की जाती है। इसके पीछे उनकी मान्यता है की ऐसा करने से उनकी वुडू देवी प्रसन्न होती हैं।

उनकी मान्यताओं की मानें तो वुडू देवी उन सभी की तरह से रक्षा करती हैं। वुडू देवी जब प्रसन्न रहती हैं तब वे दुःख दर्द और बीमारी से उन सभी को बचाती हैं।

यहाँ अंतिम संस्कार में बुलाई जाती हैं स्ट्रिप डांसर्स (Strip Dancers in Antim Sanskar)

आपको यह जानकर और भी हैरानी होगी की ताइवान में लोग मृत आदमी के अंतिम संस्कार में स्ट्रिप डांसर्स को बुलाते हैं और उसके डांस का लुत्फ़ उठाते हैं।

इसके पीछे उनकी मान्यता है ऐसा करने से मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है। ऐसा करना उनके अंतिम-संस्कार करने के लिए आवश्यक होता है।

चीन के कुछ हिस्सों में भी अंतिम-संस्कार के दौरान स्ट्रिप डांसर्स बुलाने की परम्परा है।

मरने से पहले ही मर रहे आदमी को जीवित ही बर्फ में लिटा देते हैं ये लोग | Weird funeral in Hindi

अभी तक हमलोगों ने अंतिम संस्कार की जितने भी परम्पराओं के बारे में जाना वे सभी व्यक्ति की मृत्यु हो जाने के बाद की जाती हैं। लेकिन अब जिस परम्परा की हम बात करने जा रहे हैं, वो मरने से पूर्व मरनेवाले जीवित व्यक्ति के साथ की जाती है।

ध्रुवीय प्रदेशों में रहने वाले एस्किमो लोगों में कुछ ऐसी ही परम्परा है। एस्किमों के परिवार में जब किसी सदस्य की मृत्यु होने वाली होती है तब वे मरनेवाले व्यक्ति को तैरते हुए बर्फ के बड़े टुकड़े पर लिटाकर छोड़ देते हैं।

एस्किमों लोग पुनर्जन्म के सिद्धांत में आस्था रखते हैं। एस्किमों लोग बताते हैं कि मरनेवाला व्यक्ति उनके लिए बोझ नहीं होता है, बल्कि उनके द्वारा ऐसा करना, उसे सम्मान पूर्वक विदाई देने का एक तरीका मात्र है। 

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