आयुर्वेद में मर्म चिकित्सा के अनुसार बिछिया पहनने से स्त्रियों की प्रजनन शक्ति बढ़ती है। इसका कारण यह बताया गया है कि बिछिया पहनने से सायटिक नामक नस दबती है जिसकी वजह से आसपास की नसों में रक्त प्रवाह तेज हो जाता है। फलस्वरूप स्त्रियों के गर्भाशय, ब्लैडर और आँतों की तरफ रक्त का प्रवाह सही रूप से होता रहता है। फलस्वरूप स्त्रियों की प्रजनन शक्ति में इजाफा होता है…

हिन्दू औरतें बिछिया क्यों पहनती हैं? बिछिया पहनने के क्या फायदे हैं? भारतीय संस्कृति में बिछिया पहनने के पीछे क्या विज्ञान है?

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार सुहागन स्त्रियों को अपने दोनों पैरों की तीन-तीन उँगलियों में अंतिम आभूषण के रूप में  चांदी की बिछिया पहनने की मान्यता है।

ऐसी मान्यता है कि एक स्त्री के सोलह श्रृंगार, चांदी की बिछिया और सोने के मांग टिका (माथे का टिका) के बिच होती है। मांग टिका स्वर्ण का होता है जबकि बिछिया चांदी की होती है। बिछिया को भारतीय स्त्री का अंतिम आभूषण माना गया है। 

स्त्रियों द्वारा चांदी की बिछिया पहनना सिर्फ उनके सुहागन होने की निशानी मात्र ही नहीं है बल्कि इसके कुछ महत्वपूर्ण वैज्ञानिक फायदे भी छुपे हुए हैं।

भारतीय स्त्रियों के बिछिया पहनने के 6 फायदे 

1.भारतीय वेदों की मानें तो दोनों पैरों की उँगलियों में बिछिया पहनने से स्त्रियों का मासिक-चक्र नियमित रहता है।

2. बिछिया के एक्यूप्रेशरीय प्रभाव के कारण स्त्रियों के पैरों के तलवे से लेकर नाभि तक की सभी नसें और मांसपेशियां संतुलित रहती हैं।

3. आयुर्वेद में मर्म चिकित्सा के अनुसार बिछिया पहनने से स्त्रियों की प्रजनन शक्ति बढ़ती है। इसका कारण यह बताया गया है कि बिछिया पहनने से सायटिक नामक नस दबती है। जिसकी वजह से आसपास की नसों में रक्त प्रवाह तेज हो जाता है। फलस्वरूप स्त्रियों के गर्भाशय, ब्लैडर और आँतों की तरफ रक्त का प्रवाह सही रूप से होता रहता है। फलस्वरूप स्त्रियों की प्रजनन शक्ति में इजाफा होता है।

4. चांदी की बिछिया पृथ्वी के संपर्क में आने की वजह से पृथ्वी से उर्जा ग्रहण कर उसे स्त्री के शरीर में प्रवाहित करती है।

5. बिछिया के एक्यूप्रेशरिय प्रभाव के कारण स्त्री के शरीर का रक्त चाप अपेक्षाकृत नियंत्रित रहता है।

6. बिछिया पहनने से स्त्रियों में थाइराइड नामक बीमारी होने की संभावना अपेक्षाकृत कम हो जाती है।

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