इसीलिए हिन्दू संस्कृति में गंगा स्नान का महत्व बहुत बड़ा है

गंगा स्नान का महत्व

हिन्दू संस्कृति में “गंगा स्नान का महत्व” क्या है? क्यों किया जाता है गंगा स्नान?

हिन्दू संस्कृति में गंगा नदी को बहुत ही पवित्र नदी माना गया है। गंगा नदी की पवित्रता के बारे में आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि हिन्दू गंगा नदी को एक नदी के रूप में नहीं बल्कि एक माँ के रूप में पूजा करते हैं। वे गंगा नदी को गंगा माँ, गंगा मैया और गंगा देवी कहकर पुकारते हैं।

गंगा नदी का धार्मिक महत्व 

हिन्दू संस्कृति में ऐसी मान्यता है कि गंगा माँ के पानी में स्नान करने से जीवन के सारे पाप धुल जाते हैं और और इन्सान को मृयु के पश्चात स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है।

सभी आस्थावान हिन्दू अपने जीवन काल में कम से कम एक बार गंगा स्नान जरुर करना चाहते हैं। हिन्दू धर्म में “गंगा स्नान का महत्व” बहुत ऊँचा है।

प्राचीन समय में जितने भी नगर या गाँव बसते थे  उनमें अधिकांशतः किसी न किसी नदी के किनारे ही बसते थे। उस समय में पानी की जरूरत पूरी करने का सबसे बड़ा साधन नदी ही होती थी। हिन्दू संस्कृति में जो चीज मानव जीवन के लिए फायदेमंद होती थी, उसकी पूजा की जाति थी। इसीलिए भारतीय संस्कृति में आज भी एक परंपरा के रूप में पेड़-पौधों और नदियों की पूजा की जाती है।

नदियों में गंगा नदी को सर्वश्रेष्ठ और पूजनीय मानने के पीछे कुछ आध्यात्मिक और कुछ वैज्ञानिक कारण हैं।

गंगा स्नान के वैज्ञानिक फायदे क्या हैं?

लखनऊ में स्थित नेशनल बोटैनिकल रिसर्च इंस्टिट्यूट गंगा नदी के पानी में बीमारी पैदा करनेवाली हानिकारक बैक्टीरिया ई. कोलाई को मारने की क्षमता है। 

वैज्ञानिक खोजों से यह पता चला है कि गंगा के पानी में औषधीय गुण होते हैं। गंगा जब हिमालय पहाड़ से निकलती है तब बहुत तरह के खनिज तत्व और जड़ी-बूटियां उसके पानी में मिलकर पानी को औषधीय गुणों से भरपूर कर देती हैं।

वैज्ञानिक परीक्षणों से यह साबित हो चूका है कि गंगा के पानी के इन्हीं औषधीय गुणों के कारण गंगा के पानी में स्नान करने से और गंगा का पानी पीने से मलेरिया, हैजा और प्लेग जैसी महामारी फ़ैलाने वाले कीटाणु नष्ट हो जाते हैं।

अन्य नदियों के अपेक्षा गंगा नदी के पानी में वातावरण से प्राणवायु यानि कि ऑक्सीजन सोखने की क्षमता बहुत होती है।

गंगा के पानी में प्रचुर मात्र में गंधक मिला होता है। इसीलिए गंगा का पानी लम्बे समय तक ख़राब नहीं होता है।

गंगा जल के इन्ही औषधीय गुणों के कारण गंगा स्नान करने से कुछ तरह के चर्म रोग भी ठीक हो जाते हैं।

प्राचीन समय में गंगा का पानी बिलकुल शुद्ध और पवित्र होता था लेकिन आजकल शहरों की गंदे नालों के पानी इसमें मिल जाने की वजह से गंगा का पानी पहले जैसा शुद्ध और पवित्र नहीं रह गया है। 

आज भले ही गंगा का पानी पहले जैसा शुद्ध नहीं रह गया है, लेकिन हिन्दू जनमानस में “गंगा स्नान का महत्व”  आज भी बहुत ऊँचा है।

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