गायत्री मंत्र का महत्व क्या है | सूर्य गायत्री मंत्र के लाभ क्या हैं?

गायत्री मंत्र का महत्व

हिन्दू संस्कृति में “गायत्री मंत्र का महत्व” और “सूर्य गायत्री मंत्र के लाभ” क्या हैं?

भारतीय संस्कृति में कोई भी पूजा या यज्ञ बगैर मंत्रोचारण के संपन्न नहीं हो सकता। पूजा या यज्ञ के दौरान मन्त्रों का सही-सही उच्चारण करना बहुत ही जरुरी होता है। किसी भी पूजा-अर्चना को पूर्णता प्रदान करने हेतु पूजा के अनुसार ही मन्त्रों का जाप किया जाता है। हिन्दू धर्म में “गायत्री मंत्र का महत्व” बहुत ज्यादा है।

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार मन्त्रों में असीम शक्ति होती है। सभी मन्त्रों का आधार “अक्षर विज्ञान” होता है। हिन्दू परम्पराओं में प्रत्येक देवी-देवता को खुश करने के लिए अलग-अलग मन्त्रों की रचना की गई है। हर मन्त्र के अपने गुण और अपनी अलग विशेषता होती है। लेकिन उन सभी मन्त्रों में “गायत्री मंत्र तंत्र” को उत्तम और सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

वेदों में गायत्री मन्त्र को बहुत चमत्कारिक और लाभदायक बताया गया है। गायत्री मन्त्र हिन्दू धर्म का मूल मन्त्र है।

गायत्री मन्त्र सूर्य देव को समर्पित होता है। इसीलिए इस मन्त्र का जाप सुबह में सूर्योदय के समय या फिर शाम में सूर्यास्त के समय किया जाता है।

हिन्दू धर्म में अनेक प्रकार के मन्त्र हैं और प्रत्येक मन्त्र का कोई न कोई एक देवता होता है, जिसकी दिब्य शक्ति से देव मन्त्र फलित और सिद्ध होता है । सूर्य भगवान (सविता) गायत्री महामंत्र का देवता हैं।

“गायत्री मन्त्र तंत्र”“ॐ भूर्भुवः स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।”

“गायत्री मंत्र का अर्थ” :- “हे प्रभु! आप हमारे जीवन के दाता हैं। आप हमारे दुख़ और दर्द का निवारण करने वाले हैं। आप हमें सुख़ और शांति प्रदान करने वाले हैं। हे संसार के विधाता, हमें शक्ति दो कि हम आपकी उज्जवल शक्ति प्राप्त कर सकें। कृपा करके हमारी बुद्धि को सही रास्ता दिखाएं।” यही है सूर्य “गायत्री मंत्र का अर्थ व महिमा”

“गायत्री मंत्र तंत्र” के बारे में विशेष जानकारी 

मनुष्य का शरीर 24 तत्व विशेष से निर्मित है। चेतन्य, मन, बुद्धि, आत्मा, ष्ट धातु,  पञ्च कर्मेन्द्रिया, पञ्च ज्ञानेद्रियाँ और पञ्च महाभूत।

गायत्री मन्त्र के सभी 24 अक्षरों का गुंथन कुछ इस प्रकार से है कि उनके उच्चारण से जिह्वा, तालू और मुख में स्थित विशेष नाड़ियों का एक क्रमबद्ध अतिविशिष्ट सञ्चालन होता है। इस क्रमबद्ध अतिविशिष्ट सञ्चालन के फलस्वरूप शरीर के अन्य भागों में स्थित यौगिक-चक्र  जागृत होने लगते हैं। गायत्री के शुद्ध उच्चारण  मात्र से शरीर की लघु ग्रंथियों  को जागृत कर आश्चर्यजनक रूप से सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

विज्ञान की नजर में “गायत्री मंत्र का महत्व” और “सूर्य गायत्री मंत्र के लाभ”

1.  गायत्री मन्त्र के निरंतर जाप करने से मस्तिष्क शांत होता है।

2.  इस मन्त्र का जाप करने से हमारा रक्त चाप (Blood Pressure) नियंत्रित रहता है।

3.  गायत्री मन्त्र का नियमित रूप से प्रतिदिन सात बार जाप करने से आसपास सकारात्मक उर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है।

इसीलिए हिन्दू संस्कृति में “गायत्री मंत्र का महत्व” और “सूर्य गायत्री मंत्र के लाभ” बहुत ज्यादे हैं।

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