हवन या यज्ञ करना क्या एक ढकोसला है | हवन का महत्व

हवन का महत्व

भारतीय संस्कृति में “हवन का महत्व” क्या है? “हवन और यज्ञ में अंतर” क्या है?

हिन्दू संस्कृति में हवन और यज्ञ, शुद्धिकरण और मनोकामना पूर्ति की एक पवित्र प्रक्रिया है। हवन और यज्ञ, हिंदू धर्म में शुद्धीकरण का एक महत्वपूर्ण कर्मकांड है। हिन्दू परंपरा की किसी भी पूजा में, चाहे वो छोटी हो या फिर बड़ी, “हवन करना” शुभ होता है। यज्ञ में भी हवन होता है लेकिन यज्ञ का स्वरुप बहुत बड़ा होता है।

हिन्दू संस्कृति की प्रत्येक परम्परा में विज्ञान के दर्शन होते हैं न कि अज्ञानता या अन्धविश्वास के। हिन्दू संस्कृति की यही सबसे बड़ी विशेषता भी है।

हवन और यज्ञ में क्या अंतर है?

अग्नि-कुंड में अग्नि प्रज्वलित कर अग्नि के माध्यम से अपने इष्ट देव यानि कि ईश्वर की उपासना करने की प्रक्रिया को यज्ञ कहा जाता है। यज्ञ या पूजा के दरम्यान अग्नि-कुंड में आहुति देने की प्रक्रिया को हवन कहा जाता है।

हिन्दू परम्परा में यज्ञ किसी खास मनोकामना की पूर्ति या फिर आई हुई किसी विपदा या अनिष्ट को टालने के लिए किया जाता है, जबकि हवन शुद्धिकरण का एक कर्मकाण्ड है।

यज्ञ पूजा का एक बहुत बड़ा उपक्रम है जबकि हवन उस यज्ञ का एक हिस्सा मात्र है। हवन, अग्नि के माध्यम से देवताओं को मंत्रोचार के साथ हवि यानि कि भोजन पहुँचाने की प्रक्रिया है।

वैज्ञानिक नजरिए से “हवन का महत्व”

1.  फ्रांस के वैज्ञानिक त्रिले की नई खोज के अनुसार यज्ञ के दौरान हवन कुण्ड में जिस सामग्री से आहुति दी जाती है, उसके जलने से फार्मिक आल्डीहाइड नामक गैस मुक्त होती है। यह गैस रोग उत्पन्न करने वाले हानिकारक रोगाणुओं और बैक्टीरिया इत्यादि को नष्ट कर पर्यावरण को स्वच्छ और शुद्ध करता है।

2.  आधुनिक रिसर्च के मुताबिक आधे घंटे तक हवन कुंड के बगल में बैठने से हवन के धुएं का हमारे शरीर पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। इससे टाइफाइड जैसे घातक बीमारियां फैलाने वाले जीवाणु नष्ट हो जाते हैं और हमारा शरीर शुद्ध हो जाता है।

3.   हवन के पवित्र धुएं के सम्पर्क में कुछ देर तक रहने से व्यक्ति के फेफड़ों और श्वास सम्बन्धी समस्याएं नष्ट होती हैं। जिसके पश्चात श्वसन तंत्र ठीक ढंग से कार्य करने लगता है।

निष्कर्ष : यज्ञ और हवन का महत्व 

फ़्रांसिसी वैज्ञानिक त्रिले की आज की  खोज को भारतीय ऋषि-मुनियों ने हजारों साल पहले ही जान लिया था और इसीलिए उसे अपनी संस्कृति का अभिन्न अंग बना लिया था। इसी वैज्ञानिकता के चलते हिन्दू धर्म में यज्ञ और “हवन का महत्व” बहुत ज्यादा है।

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