जानिए हाथ जोड़कर नमस्ते करने के 4 वैज्ञानिक फायदे

हाथ जोड़कर नमस्ते करना

हाथ जोड़कर नमस्ते क्यों करते हैं? हिन्दू लोगों का “हाथ जोड़कर नमस्ते करना” क्या विज्ञान की नजर में सही है? भारतीय संस्कृति में नमस्कार करने के वैज्ञानिक फायदे क्या हैं?  

हिन्दू संस्कृति में या यूँ कहें कि भारतीय संस्कृति में किसी से मिलने पर उसका अभिवादन दोनों हाथ जोड़कर करने की परम्परा है। लेकिन आजकल के समय में पाश्चात्य संस्कृति का असर भारतीय संस्कृति पर हावी होने लगा है, जिसके परिणाम स्वरुप हम लोगों का अभिवादन दोनों हाथ जोड़कर नहीं बल्कि हाथ मिलाकर और हाय, हेल्लो जैसे शब्दों का प्रयोग करके करने लगे हैं।

लेकिन जब आप हाथ जोड़कर नमस्ते करने के वैज्ञानीक तथ्यों के साथ 4 स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदों के बारे में जानेंगे, तब आप हाथ मिलाकर अभिवादन करने वाली आदत को बाय बाय कर देंगे। फिर आपको भारतीय संस्कृति के हाथ जोड़कर अभिवादन करने वाली परम्परा पर गर्व होगा।

हाथ जोड़कर नमस्ते करने के पीछे छिपे 4 मत्वपूर्ण वैज्ञानिक फायदे 

1.  याददास्त बढ़ना :- अभिवादन की मुद्रा में जब हम अपने दोनों हाथ जोड़ते हैं तब दोनों हाथों की सभी उँगलियों के शीर्ष एक दुसरे का दबाव पड़ता है। इस दबाव यानि कि एक्यूप्रेशर के कारण इसका सीधा और सकारात्मक असर हमारी आँख, कान और दिमाग पर पड़ता है। इस सकारात्मक असर की वजह से हम सामने वाले आदमी को लम्बे समय तक याद रख पाते हैं।

2. सुरक्षित रहना :- अभिवादन स्वरुप हाथ मिलाने से सामने वाले आदमी से हमारा डायरेक्ट संपर्क होता है। सामने वाला आदमी अगर किसी संक्रामक बीमारी से ग्रसित है तो उसके कीटाणु हमारे तक सीधे पहुँच सकते हैं। इससे हमारे स्वास्थ्य को उस संक्रामक बीमारी का खतरा उत्पन्न हो सकता है। दोनों हाथ जोड़कर नमस्ते करने से हम सामने वाले का अभिवादन भी कर लेते हैं और उसके स्पर्श से भी बच जाते हैं।

3. दिल मजबूत होना :- हमारी हाथ की कोशिकाएं, दिमाग की कोशिकाओं से जुडी होती हैं। अभिवादन करते वक्त जब हम अपने दोनों हाथ जोड़ते हैं, तब दोनों हथेलियों के बीच बनने वाले दबाव के फलस्वरूप हमारे हृदयचक्र और आज्ञाचक्र एक्टिव होने लगते हैं। इसके फलस्वरूप हमारा मन शांत होता है और हमारा दिल मजबूत होता है। दिल मजबूत होने से हमारे अंदर का डर खतम होता है।

4. प्रेम और लगाव का बढ़ना :- अभिवादन करते समय जब हम दोनों हथेलियों को अपने सीने के नजदीक से जोड़ते हैं, तब यहाँ पर स्थित एक चक्र जागृत होने लगता है, जो कि प्रेम और स्नेह का प्रतिक होता है। फलस्वरूप सामने वाले ब्यक्ति के प्रति हमारे मन में आदर और सम्मान का भाव जागृत होने लगता है।

Note-

हाथ जोड़कर नमस्ते करने के इन्हीं सब फायदों की वजह से हमारे ऋषि-मुनियों ने इसे भारतीय संस्कृति में समाहित किया है। यही कारण है कि हाथ जोड़कर नमस्ते करना या नमस्कार करना भारतीय संस्कृति (Indian Culture) का एक अनिवार्य हिसा है।

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