भारतीय संस्कृति के अनुसार शादीशुदा औरतें अपने सुहाग के प्रतिक के रूप में अपनी दोनों हाथों में चूड़ियाँ पहनती हैं। औरतों के सोलह श्रृंगार में चूड़ियों का एक विशेष स्थान और महत्व है।
पहनी जानेवाली चूड़ियाँ कांच की हैं या किसी धातु विशेष की, विज्ञान की नज़रों में इसका भी अपना  अलग अलग महत्व होता है…..

शादी के बाद महिलाएं क्यों पहनती हैं चूड़ियाँ? चूड़ी पहनने के वैज्ञानिक फायदे क्या हैं? चूड़ी पहनना फैशन है या विज्ञान?

भारतीय संस्कृति के अनुसार शादीशुदा औरतें अपने सुहाग के प्रतिक के रूप में अपनी दोनों हाथों में चूड़ियाँ पहनती हैं। औरतों के सोलह श्रृंगार में चूड़ियों का एक विशेष स्थान और महत्व है। अगर कोई सुहागन स्त्री अपने हाथों में चूड़ियाँ न पहने तो उसका श्रृंगार अधुरा माना जाता है। सुहागिनों के हाथ में खनकती चूड़ियाँ उनकी खूबसूरती और आकर्षण को बढ़ा देती हैं।

विज्ञान की नजर में भारतीय औरतों द्वारा सुहागन की निशानी के रूप में पहनी जानेवाली चूड़ियों का अपना एक वैज्ञानिक महत्व है। पहनी जानेवाली चूड़ियाँ कांच की हैं या किसी धातु विशेष की, विज्ञान की नज़रों में इसका भी अपना  अलग अलग महत्व होता है।

चूड़ी पहनने के वैज्ञानिक फायदे क्या हैं?

1. चूड़ियाँ पहनने के उपर हुए एक शोध से पता चला है, कि औरतों के हाथों में उपस्थित एक्यूप्रेशर पॉइंट्स पर चूड़ियों का एक दबाव पड़ता रहता है। इस एक्यूप्रेशरीय दबाव की वजह से उनकी शारीरिक और मानसिक मजबूती मजबूत होती है। सके साथ साथ वे कई बीमारियाँ होने से भी बच जाती हैं।

2. वैज्ञानिकों के एक शोध में यह भी पता चला है कि औरतों द्वारा अलग-अलग धातुओं की चूड़ियाँ पहनने का असर उनपर अलग-अलग पड़ता है। जैसे कि सोने या चांदी की बनी चूड़ियाँ पहनने से औरतों को मानसिक सुकून मिलता है।

3. विज्ञान कहता है कि कांच की चूड़ियों की खनकती आवाज से वातावरण में सकारात्मक उर्जा का संचार होता है। वैसे भी औरतों के हाथों में खनकती कांच की चूड़ियों से उत्पन्न होने वाली ध्वनि कानों के लिए बहुत ही मधुर और आनंद प्रिय होती है।

4. सुहागन स्त्री के हाथ जब भी हिलते हैं, तब उसके कलाई और चूड़ियों के बीच होने वाली घर्षण की वजह से उसके हाथों में रक्त संचार तेज होता है। यह घर्षण उर्जा भी पैदा करती है, जो औरतों में थकान की अनुभूति को कम करती है।

नोट:-

यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में चूड़ी पहनना अनिवार्य और महत्वपूर्ण होता है। भारतीय औरतों द्वारा चूड़ी पहनना सिर्फ एक फैशन भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ी वैज्ञानिक सोच है।

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