पीपल की पूजा करने के पीछे छुपे हैं 3 वैज्ञानिक कारण 

क्यों की जाती है पीपल की पूजा

हिन्दू धर्म में क्यों की जाती है पीपल की पूजा? पीपल को न काटने के पीछे क्या है मान्यता? पीपल की पूजा करने के फायदे क्या हैं?

हिन्दू संस्कृति में पीपल के पेड़ में पितरों का वास माना गया है। पीपल के पेड़ में सभी तीर्थों का निवास होता है। यही कारण है कि मुंडन आदि संस्कार पीपल के पेड़ के नीचे करने का रिवाज है।

हिन्दू संस्कृति में पीपल की पूजा इसलिए भी की जाती है क्योंकि इसमें आत्मा और भुत-प्रेतों का निवास होता है। यही कारण है कि किसी व्यक्ति के मृत्यु के उपरांत उसका कर्म-कांड करने हेतु पीपल के पेड़ की जरूरत पड़ती है।

ये सब तो पीपल की पूजा करने का धार्मिक महत्व है, जिसकी वजह से लोग पीपल की पूजा करते हैं।

लेकिन हमारे ऋषि-मुनियों ने सिर्फ इसके धार्मिक महत्व की वजह से ही इसे पूजनीय नहीं बतलाया है, बल्कि पीपल की पूजा करने के पीछे बहुत बड़े विज्ञान के रहस्य छुपे हुए हैं, जिसे हम सभी को जरुर जानने चाहिए।

अगर सही बात की जाए तो मानव जाति के लिए पीपल के पेड़ की बहुत सारी उपयोगिता है और इसी की वजह से हिन्दू धर्म में पीपल के पेड़ को काटने की मनाही है। शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि पीपल का पेड़ काटने का मतलब पितरों को काटना है।

पीपल के पेड़ की उपयोगिता की वजह से ही धर्म से जोड़कर इसे पूजनीय बना दिया गया, ताकि लोग चाहकर भी इसे काट न सकें और सभी मानव जाती को पीपल का फायदा मिलता रहे।

आखिर क्यों की जाती है पीपल की पूजा?

 1. विज्ञान के अनुसार पीपल का पेड़ प्राणवायु यानि कि ऑक्सीजन का बहुत बड़ा स्रोत है। इसका मतलब यह है कि पीपल में पर्याप्त मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करने और ऑक्सीजन छोड़ने की क्षमता होती है। पीपल ही एकमात्र ऐसा पेड़ है जो रात्रि के समय भी प्राणवायु यानि कि ऑक्सीजन छोड़ता है।

2. पीपल एक ऐसा पेड़ है जो गर्मी में शीतलता और जाड़े में उष्णता प्रदान करता है।

3. आयुर्वेद में पीपल के बहुत ज्यादे चिकित्सीय गुणों का  वर्णन किया गया है। पीपल के पेड़ के प्रत्येक भाग, जैसे कि, पत्ते, तना, छाल, फल इत्यादि का उपयोग कई तरह के रोगों के इलाज में किया जाता है।

औषधि के रूप में पीपल का उपयोग सांस की तकलीफ दूर करने में, दांतों का दर्द दूर करने में, विष का असर कम करने में, त्वचा सम्बन्धी रोगों के उपचार में, सर्दी-जुकाम को ठीक करने में, पीलिया के ईलाज में, फटी एडियों को ठीक करने में, हकलाने की समस्या को दूर करने में, नकसीर फूटने पर उसे ठीक करने में, घाव को ठीक करने में, मानसिक तनाव कम करने इत्यादि में होता है।

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