भगवान् तो हर जगह है फिर मंदिर जाना क्यों जरुरी है?

मंदिर जाना

भगवान् तो हर जगह है फिर पूजा करने के लिए “मंदिर जाना” क्यों जरुरी है? हम मंदिर क्यों जाते हैं और इसका वैज्ञानिक कारण क्या है?

हिन्दू संस्कृति में मंदिर का स्थान बहुत ही पवित्र और पूजनीय होता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, मंदिर देवी-देवताओं के साथ-साथ सभी अच्छी शक्तियों का निवास स्थान होता है। 

हम मंदिर क्यों जाते हैं : धार्मिक कारण 

मंदिर एक पवित्र स्थान होता है। मंदिर में भगवान और सभी अच्छी शक्तियों का वास होता है। अगर हम मंदिर में जाकर भगवान से सच्चे मन से अपने दुखों के निवारण हेतु प्रार्थना करते हैं, तब भगवान के साथ-साथ सभी अच्छी शक्तियां भी हमारे दुखों को दूर करने में मदद करती हैं।

रहस्य (The Secreat) नामक किताब के अनुसार हमारे मन से निकलने वाले विचारों के भी तरंग होते हैं। जब हम सच्चे मन से किसी चीज की कामना करते हैं, तब हमारे मन से अच्छी तरंगें (positive waves) निकती हैं। जब ये positive waves मंदिर में स्थित अच्छी शक्तियों और देवताओं से टकराती हैं तब ये शक्तियां हमारे इच्छा पूर्ति के लिए काम करना शुरू कर देती हैं । फलस्वरूप समय के साथ हमारी मनोकामना पूर्ण हो जाती है।

मंदिर जाना क्यों जरुरी है : मनोवैज्ञानिक कारण 

इस धरती पर कोई भी ऐसा इंसान नहीं है जिससे कभी पाप या अपराध न हुआ हो। किसी के अपराध मामूली होते हैं तो किसी के बहुत भयंककर। कुछ अपराध या पाप कर्म ऐसे होते है जिसे सिर्फ वह व्यक्ति ही जानता है। वह पाप कर्म उस आदमी के मन-मस्तिष्क में एक बोझ की तरह होता है जो उसे हर पल तनाव में रखता है।

आज तो विज्ञान ने भी यह सिद्ध कर दिया है कि, अगर किए गए पापों को प्रायश्चित स्वरुप किसी को बता दिया जाए तो मन हल्का हो जाता है।

व्यावहारिक जीवन में किसी अन्य को हम अपने किये गए पापों को नहीं बता सकते हैं, क्योंकि ऐसा करने पर भविष्य में वो हमारे लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। लेकिन मंदिर में जाकर अपने भगवान के सामने बिना किसी भय के हम अपने पापों का प्रायश्चित कर सकते हैं। ऐसा करने के बाद हमारा मन तनावमुक्त और हल्का हो जाता है।

मंदिर क्यों जाना चाहिए : वैज्ञानिक कारण 

हिन्दू मंदिर के वास्तु, मूर्ति, प्रज्वलित दीपक, घंटी और शंख की आवाज इत्यादि के कारण मंदिर में हमेशा सकारात्मक उर्जा का प्रवाह होता रहता है। प्राचीन मंदिर प्रार्थना और सकारात्मक उर्जा के केंद्र हुआ करते थे क्योंकि उस समय के मंदिर शत-प्रतिशत वास्तु और विज्ञान को ध्यान में रखकर बनाए जाते थे।

मंदिर का गर्भगृह वह पवित्र स्थान होता है जहाँ पृथ्वी की चुम्बकीय तरंगे सबसे ज्यादे होती हैं। फलस्वरूप मंदिर के गर्भगृह में उर्जा का प्रवाह सबसे ज्यादे होता है। जब हम मंदिर के गर्भगृह में जाकर ध्यान उपासना करते हैं तब हमारा शरीर इस सकारात्मक उर्जा को ग्रहण कर लेता है। इसके फलस्वरूप हमारा मस्तिष्क शांति अनुभव करता है। इस उर्जा को ग्रहण करने से हमारा शारीरिक स्वास्थ्य में भी सुधार होता है।

हम मंदिर क्यों जाते हैं : निष्कर्ष 

प्रतिदिन मंदिर जाने से हमारा मानसिक विकाश सुदृढ़ होता है और मन को असीम शांति मिलती है। इस प्रकार हम पाते हैं कि हिन्दू संस्कृति के अनुसार “मंदिर जाना” धार्मिक, मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक कारणों से युक्तिसंगत और प्रमाणित है। अतः हमें प्रतिदिन मंदिर जाना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published.