वैज्ञानिक कारण – सोने को पैरो में न धारण करने का यह कारण है, हमारे शरीर के सर का भाग ठंडा होता है, पर हमारे पैर गर्म होते हैं।
सोना एक ऐसा धातू है, जिसमें से गर्म ऊर्जा निकलती है, पर चाँदी से शीतल ऊर्जा निकलती है। इसी कारण से चाँदी को पैरो में पहना जाता है, ताकि वह उसकी शीतलता सर तक पहुँचा सके। और सोने की गर्म ऊर्जा पैरों तक पहुँच सके इसलिए उसे सर पर पहना जाता है।

पैरों में पायल पहनने के फायदे क्या हैं? हिन्दू औरतें पायल क्यों पहनती हैं? भारतीय संस्कृति में हन्दू औरतों के पायल पहनने के पीछे क्या विज्ञान है? पैरों में सोना से बने आभूषण क्यों नहीं पहने जाते?

भारतीय संस्कृति में चांदी के पायल को शुभ माना गया है। कोई स्त्री कितना भी संपन्न क्यों न हो, उसके लिए भी सिर्फ चांदी के पायल को ही धारण करने का विधान है।

शरीर में नाभि से नीचे स्वर्ण धारण करना वर्जित किया गया है। स्त्रियाँ अपनी नाभि से नीचे सिर्फ चांदी से बने आभूषण ही पहन सकती हैं। इसीलिए पायल कभी भी सोने के नहीं पहने जाते।

सोने को पैरो में धारण न करने का अपना वैज्ञानिक कारण है। हमारे शरीर के सिर का भाग ठंढा और पैर का भाग गर्म होता है। सोना से गर्म ऊर्जा और चाँदी से शीतल ऊर्जा निकलती है।

चाँदी को पैरो में पहनने से उसकी शीतलता सिर तक पहुंचती है। सोने को सिर की तरफ वाले भाग में पहनने से उसकी गर्म ऊर्जा पैरों तक पहुँचती है। सोने को सिर की तरफ और चांदी को पैरों में पहनने के पीछे का विज्ञान यही है।

सोने को पैर में पहनने से उसकी गरमी सिर में पहुंचेगी और इससे दिमाग को एकाग्रचित करने में परेशानी होगी। दिमाग अपेक्षाकृत गरम रहेगा।

यह पारंपरिक आभूषण अब सिर्फ विवाहित स्त्रियों के ही लिए नहीं रह गया है। बल्कि आजकल तो यह कुंवारी लड़कियों के लिए भी एक ट्रेंड बन गया है।

नवविवाहिता के द्वारा पहने गए पायलों से निकलने वाली रुनझुन और छम-छम की आवाज घर में एक मधुर ध्वनि उत्पन्न करती है, जो हमारे मन को मंत्रमुग्ध कर देती है। पायल की ये आवाज घर का वातावरण संगीतमय बना देती है।

पायल पहनने का महत्व क्या है?

कुछ दसक पहले तक भारत में सयुंक्त परिवार हुआ करता था। उस समय घर की सभी औरतें पायल / पायजेब पहना करती थीं। ऐसा इसलिए भी कि पायल की छम-छम की आवाज से घर में मौजूद मर्द को पता चल जाता था कि कोई औरत आ रही है, और वो अपने को ब्यवस्थित कर लेते थे। ऐसा होने से घर के दोनों सदस्य असहज स्थिति से बच जाते थे।

पायल पहनने के फायदे क्या हैं?

1.  वास्तु के अनुसार पायल की छम-छम की आवाज नकारात्मक उर्जा को दूर करती है और सकारात्मक उर्जा को बढ़ाती है।

2.  पायल पहनने से औरतों के पेट के निचले हिस्से में अनावश्यक वसा (Fat) के जमाव होने की क्रिया धीमी हो जाती है। इस प्रकार स्वास्थ्य कि दृष्टि से भी पायल पहनना फायदेमंद साबित होता है।

3.  पायल पहनने से पैरों से होकर निकलने वाली शारीरिक विद्युत उर्जा शरीर में ही संरक्षित रखती है।  

4.  पायल हमेशा पैरों की त्वचा से रगड़ खाती रहती है। जिसके फलस्वरूप  पायल के तत्व त्वचा से रगड़ खाकर शरीर के अंदर चले जाते हैं और हड्डियों को मजबूती प्रदान करते हैं।

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