सूर्य को अर्घ्य देने के 3 जबरदस्त फायदे

सूर्य को अर्घ्य क्यों देते हैं

सूर्य को अर्घ्य क्यों देते हैं? सूर्य को जल चढ़ाने का सही तरीका क्या है? प्रतिदिन सुबह में सूर्य को अर्घ्य  देने से क्या लाभ होते हैं? सूर्य को जल चढ़ाने के वैज्ञानिक कारण क्या है?

ताम्बे के लोटे या मिट्टी के पात्र में  जल लेकर सुबह के समय सूर्य की ओर देखते हुए अपनी दोनों आँखों के सामने से पानी की धार को धीरे-धीरे  गिराने की प्रक्रिया को सूर्य को अर्घ्य देना या सूर्य को जल चढ़ाना कहते हैं।

सूर्य को अर्घ्य हमेशा सुबह के 8 बजे से पहले ही देना चाहिए। सूर्य को अर्घ्य देने से पहले नीति क्रिया से निवृत हो स्नान करने के पश्चात् ही सूर्य जो अर्घ्य देना चाहिए।

भारतीय संस्कृति में कोई भी रीती-रिवाज या परंपरा बस यूँ ही नहीं होती, बल्कि इसके कुछ न कुछ आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण होते हैं और यही भारतीय संस्कृति की विशेषता भी है।

क्या है सूर्य को अर्घ्य देने की विधि?

 1.  अर्घ्य नदी में, तालाब में या फिर घर पर भी दे सकते हैं।

2.  वैसे तो उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देना सबसे शुभ होता है। लेकिन इसके अलावा सूर्य उगने के एकाध घंटे बाद तक भी अर्घ्य दिया जा सकता है।

3.  स्नान करने के पश्चात् ही सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए।

4.  सूर्य को जल चढ़ाते समय सफेद वस्त्र धारण करना शुभ होता है।

5.  ताम्बे के लोटे या फिर मिट्टी के पात्र से अर्घ्य देना चाहिए। 

सूर्य को अर्घ्य क्यों देते हैं?

1. सुबह में सूर्य को अर्घ्य देते समय सूर्य से आनेवाली किरणें जब पानी की धार से छनकर हमारी आँखों तक पहुँचती है तब वे हमारी आँखों की रौशनी के लिए लाभदायक होती हैं। नियमित रूप से सूर्य को अर्घ्य देने से हमारी आँखों की रौशनी तेज होती है।

पानी की धार से छन छन कर आने वाली सूर्य की किरणें हमारी आँखों के लिए इतना अधिक फायदेमंद होती है कि अगर कोई इसे नियमित करता रहे तो उसे जीवन पर्यंत आँखों पे चश्मा लगाने की कोई जरूरत ही नहीं होगी।

2. सूर्य को अर्घ्य देने से अनिद्रा से मुक्ति मिलती है। जिसको अनिद्रा की समस्या है उसे नियमित रूप से सूर्य को जल चढ़ाने से उसको इस समस्या से निजात मिलने में आसानी होती है।

3. सूर्य को जल चढ़ाने से सिर दर्द से मुक्ति मिलती है। पानी की धार से छन कर आनेवाली सूर्य की किरणें हमारे सिर दर्द को दूर करने में भी सहायक होती है।

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