शादी से पहले दूल्हा दुल्हन को हल्दी क्यों लगाई जाती है? हिन्दू विवाह में क्यों जरुरी है वर-वधु को हल्दी लगाना?

हिन्दू परम्परा में विवाह के वक्त वर-वधु दोनों को “हल्दी लगाना” शुभ और अनिवार्य माना गया है। विवाह के कुछ दिन पहले से ही वर और वधु के पुरे जिस्म पे हल्दी का उबटन लगाया जाता है।

समूचे जिस्म पे हल्दी का उबटन लगाने के पीछे छुपे हैं हल्दी के अनेकों औषधीय और वैज्ञानिक गुण। लेकिन हल्दी के औषधीय गुणों  के प्रति अधिकांशतः लोगों में जानकारी का अभाव होता है। वे तो बस इसको धार्मिक अनिवार्यता समझकर पालन करते हैं।

लेकिन हल्दी की अनिवार्यता के पीछे इसके कुछ औषधीय और वैज्ञानिक पहलु भी हैं जिसे हम सभी को जरुर जानने चाहिए।

विवाह में क्यों जरुरी है हल्दी लगाना?

हल्दी के पीले रंग का हिन्दू संस्कृति में विशेष महत्व है। विवाह के समय हल्दी से बने उबटन का प्रयोग नव विवाहित जोड़े के लिए शुभ और मंगलकारी होता है। हल्दी उनके जीवन को खुशियों से भर देती है।

ऐसा माना जाता है कि हल्दी का प्रयोग नव विवाहित जोड़े को लोगों की बुरी नजर से बचाता है।

हल्दी नकारात्मक उर्जा को कम करती है। नकारात्मक उर्जा को ख़तम करने में हल्दी से बेहतर और कोई दूसरा चीज नहीं है। यही कारण है कि शादी-विवाह, पूजा-पाठ और हवन इत्यादि जैसे धार्मिक अनुष्ठानों में भी हल्दी का प्रयोग किया जाता है।

हल्दी का उबटन लगाने के फायदे-

भारतीय परम्परा के अनुसार वर-वधु को विवाह से पहले हल्दी का उबटन लगाने से उनकी सुन्दरता में चार चाँद लग जाता है।

हल्दी में एंटी ऑक्सीडेंट तत्व पाया जाता है जो वर-वधु की त्वचा को स्वच्छ, सुंदर और कान्तिमान रखने में मदद करता है। हल्दी का उबटन उनके त्वचा की सम्पूर्ण सफाई करने के साथ-साथ उनके त्वचा सम्बन्धी विकार को भी दूर करता है।

यही कारण है कि शादी के समय दूल्हा और दुल्हन को हल्दी का उबटन लगाने से उनके रंग-रूप में निखार आ जाता है।

विवाह में सबकी नजर वर और वधु की खूबसूरती पर रहती है। हल्दी का उबटन लगाने से उन दोनों की त्वचा में गजब की कांति और निखार आ जाती है।

नोट :

हिन्दू संस्कृति में विवाह से पहले वर-वधु को “हल्दी लगाना” सिर्फ एक धार्मिक कृत्य ही नहीं बल्कि उनकी त्वचा सम्बन्धी स्वास्थ्य के लिए एक अनमोल औषधि भी होता है।

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