इस धरती पर जेलिफ़िश एक ऐसा बहुकोशिकीय जीव है जो जैविक रूप से अमर है। यानि कि जेली फिश अनंतकाल तक जीवित रह सकती है।
जेलिफ़िश की कुछ प्रजातियों का जीवन काल प्लास्टिक के समान होता है, यानि कि वो कभी नहीं मरतीं। धरती की ये एकमात्र ऐसी बहुकोशिकीय जीव हैं जो अमर होती हैं।

Jelly Fish पृथ्वी का एकमात्र ऎसी जीव जो जैविक रूप से अमर है । लेकिन सवाल यह है कि जेलिफ़िश क्या है और इसके बारे में विचित्र रोचक तथ्य क्या क्या हैं?

इस धरती पर जेलिफ़िश (Jelly Fish) एक ऐसा बहुकोशिकीय जीव है जो जैविक रूप से अमर है। यानि कि जेली फिश (Jelly Fish) अनंतकाल तक जीवित रह सकती है। जेलिफ़िश एक विशाल जीव है फिर भी वह भोजन और मलत्याग,दोनों ही काम अपने मुंह से करती है। जेली फिश के ऐसे ही बहुत सारे रहस्यों के बारे में आगे हम विस्तार से जानेंगे।

आगे हम ये भी जानेंगे कि जेलिफ़िश और मनुष्यों के बीच जेनेटिक इंजीनियरिंग करके क्या हम मानवों को अमरता प्रदान किया जा सकता है?

जेली फिश इस धरती पर डायनासोर से भी बहुत पहले से मौजूद हैं। जेलीफ़िश का इतिहास हमें बताता है कि वे जीवन की शुरुआत से ही अस्तित्व में हैं।

जेलिफ़िश की संरचना के बारे में रोचक तथ्य (Interesting Facts about Structure of Jellyfish) 

jelly fish ke rochak tathya

1. क्या जेलीफ़िश एक मछली है?

मछली कशेरुकीय जीव होती हैं जिनमें मुख्य रूप से fins, scales और brain होता है। जबकि जेलिफ़िश अकशेरुकीय जीव है जिसके पास ये सब नहीं होता है। अतः जेलिफ़िश एक मछली नहीं है

2. क्या जेलिफ़िश की बॉडी ट्रांसपेरेंट होती है?

Jelly Fish पानी में पारदर्शी होती हैं, यानि कि उनके आर पार देखा जा सकता है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि उनकी बॉडी 98 परसेंट पानी से बनी होती है। इसीलिए जब कभी जेलिफ़िश समुद्र की लहरों के साथ तट पे आ जाती हैं तब वे हवा में वाष्पित हो जाती हैं।

3. जेलिफ़िश का आकर कितना बड़ा होता है?

जेलीफ़िश का आकर और वजन उनकी अलग-अलग प्रजातियों के किस्म पर निर्भर करता है। जेलिफ़िश की एक घातक प्रजाति बॉक्स जेलीफ़िश का वजन लगभग 2 किलो तक हो सकता है। जेलिफ़िश की एक बड़ी नस्ल नोमुरा का वजन पूर्ण रूप से विकशित होने पर 250 किलो तक हो सकता है।

4. क्या जेलिफ़िश खाने और मल त्यागने का काम मुंह से ही करती हैं?

हाँ, यह बिलकुल सत्य है। जेलिफ़िश जिस मुंह से भोजन करती हैं उसी मुंह से मल का त्याग भी करती हैं। इनकी ये विशेषता इन्हें बाकी के अन्य जीवों से बिलकुल ही अलग करती है।

5. क्या जेलिफ़िश की बांहों के नीचे मुंह होते हैं?

जेलीफ़िश की एक प्रजाति ब्लू ब्लबर जेली (blue blubber jelly) होती है। Blue blubber jelly में टेंटेकल्स नहीं होते हैं, बल्कि इसकी जगह भुजाएँ होती हैं इन भुजाओं के नीचे सौ मुँह होते हैं। इन्हें देखने के बाद आपको यह नहीं लगेगा कि एलियंस अजीब हैं?

6. क्या जेलीफिश के पास दिल और दिमाग होता है?

सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए जेलीफिश के बॉडी में तंत्रिका-तंत्र (Nervous System) तो होता है लेकिन अन्य जीवों के भांति इस तंत्रिका-तंत्र को नियंत्रित करने के लिए कोई दिमाग नहीं होता है। उनके पास सिर्फ एक अल्पविकसित तंत्रिका-तंत्र होता है। जेलीफिश के बॉडी में कोई दिल भी नहीं होता है।

जेलिफ़िश की विशेषताओं के बारे में रोचक तथ्य (Interesting Facts about Jelly Fish)

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7. क्या जेलिफ़िश अपने आप को क्लोन कर सकती है?

एक जेलिफ़िश में खुद को क्लोन करके चोट से निपटने की एक अजीब क्षमता होती है। एक जेलीफ़िश में खुद को पुनर्जीवित करने की क्षमता होती है। जब इसे दो भागों में काटा जाता है तब उस दोनों कटे हुए भाग से 2 नए जेलिफ़िश पैदा हो जाते हैं।

8. क्या जेलीफ़िश अमर होती हैं? Is Jelly Fish is Immortal?

JELLY FISH की कुछ प्रजातियों का जीवन काल प्लास्टिक के समान होता है, यानि कि वो कभी नहीं मरतीं। धरती की ये एकमात्र ऐसी बहुकोशिकीय जीव हैं जो अमर होती हैं। जेलिफ़िश की इस अमर प्रजाति का नाम तुरईटोप्सिस न्यूट्रीकुला (Turritopsis Nutricula) है।   

जेलिफ़िश में जीवन के 2 चरण होते हैं – Polyp stage और Medusa Stage। जेलीफिश का पोलिप फेज यौन रूप से अपरिपक्व (Immature Stage) होता है और मेडुसा फेज यौन रूप से परिपक्व (Mature Stage) होता है। जेलीफ़िश का जीवन पोलिप स्टेज के रूप में शुरू होता है और फिर मेडुसा स्टेज में वह अपना जीवन जीती है। 

तुरईटोप्सिस न्यूट्रीकुला में यह अद्भुत क्षमता होती है कि वह प्रजनन के बाद अपने जीवन-चक्र को उल्टा कर फिर से पोलिप फेज में लौट सकती है। पोलिप फेज से फिर वह मेडुसा फेज में अपने को तब्दील करके वह एक नई जिंदगी शुरू करती है। तुरईटोप्सिस न्यूट्रीकुला अपने इस अद्भुत जीवन-चक्र को अनंत समय के लिए असंख्य बार दुहरा सकती है।

इस प्रकार से तुरईटोप्सिस न्यूट्रीकुला जैविक रूप से अमर (Biologically Immortal) होती है। यह अनंत समय तक जीवित रह सकती है। प्रयोगशाला में अनेकों प्रयोगों द्वारा इसकी अमरता को सिद्ध किया जा चूका है। तुरईटोप्सिस न्यूट्रीकुला 100 % कायाकल्प करने में सक्षम है।

बेंजामिन बटन जेलीफिश (Benjamin Button jelly fish) में भी यह क्षमता होती है कि वह तनाव के समय में पॉलीप स्टेज में वापस यात्रा कर सकती है।

9. क्या जेलिफ़िश एक जहरीला जीव है?

जेलिफ़िश की कुछ प्रजातियाँ अत्यंत ही जहरीली होती हैं। इनके tentacles में बहुत विषैले असंख्य स्टिंग्स होते हैं। शिकार को पकड़ने के लिए या फिर किसी अन्य जीव से अपनी सुरक्षा के मद्देनजर जेलिफ़िश इन असंख्य स्टिंग्स से उस जीव को डंक मारकर अचेत कर देती हैं। इनका विष इतना घातक होता है कि एक सामान्य मनुष्य उनके डंक से कुछ देर में ही दम तोड़ सकता है।

10. क्या जेलिफ़िश मरने के बाद भी डंक मार सकती हैं?

जी हां, जेलीफिश मृत होने पर भी सक्रिय रूप से डंक मार सकती हैं  और यही उन्हें धरती का सबसे घातक जीव बनाता है।

सन 2010 में न्यू हैम्पशायर के वालिस सैंड्स स्टेट पार्क में लगभग 150 तैराकों को मृत जेलीफ़िश के डंक लगने की वजह से  पानी से बाहर निकाला गया था।

11. जेलिफ़िश अंधेरे में चमक क्यों बिखेरती है?

जेलिफ़िश असुरक्षित महसूस करने पर एक जैव-रासायनिक चमक बिखेरती है। यह समुद्र में खतरे या शिकारियों के खिलाफ उनके चेतावनी स्वरुप संकेत होता है।

12. क्या बड़ी जेलिफ़िश छोटी जेलीफिश को खा जाति हैं?

कुछ जेलिफ़िश की प्रजातियाँ दूसरी जेलिफ़िश को खा जाती हैं।

क्या भविष्य में आदमी जेलिफ़िश की तरह अमर हो सकता है?

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विज्ञान के सन्दर्भ में कुछ भी असंभव नहीं है। आज का विज्ञान शुक्ष्म से भी शुक्ष्म चीजों की खोज कर रहा है। वह जीवन के आधार स्तम्भ या यूँ कहें कि जीवन की मुलभुत इकाइयों के बारे में नीत नई जानकारियां एकत्रित कर रहा है। 

 हमारा शरीर असंख्य कोशिकाओं का समूह है। प्रत्येक कोशिका में केन्द्रक होता है और केन्द्रक के अंदर केंद्रिका होती है। प्रत्येक केंद्रिका में गुणसूत्र होते हैं और ये गुणसूत्र अनेकों प्रकार के जीन्स से मिलकर बने होते हैं।

विज्ञान ने यह साबित कर दिया है कि किसी भी जीव के रंग-रूप, जीवन-मरण, बचपन युवा अवस्था या फिर बुढ़ापा इत्यादि के लिए ये जीन्स ही उत्तरदायी होते हैं।

जेलिफ़िश के गुणसूत्र में कुछ ऐसे अति विशिष्ट जीन्स हैं जो उसके जैविक अमरता के लिए उत्तरदायी हैं। जीन्स के बारे में एक खास बात यह है कि जेनेटिक इंजीनियरिंग के द्वारा एक जीव के जीन्स को दुसरे जीव के गुणसूत्र में डाला जा सकता है।

इसी जेनेटिक इंजीनियरिंग की वजह से वैज्ञानिक अपने प्रयोगशाला में नई किस्म की सब्जियां या पौधे इत्यादि बना रहे हैं। जेनेटिक इंजीनियरिंग के द्वारा कुत्तों की अलग-अलग नस्लें पैदा की जा रही हैं।

अभी तक वैज्ञानिकों को जेलिफ़िश के इस अति विशिष्ट जीन्स के बारे में पता नहीं चल पाया है। और हमारा विज्ञान अभी तक इतना सक्षम भी नहीं हो पाया है कि उस अति विशीष्ट जीन्स का पता चल जाने पर उसे जेनेटिक इंजीनियरिंग के द्वारा हम मनुष्यों के गुणसूत्र में डाल सके।

लेकिन ऐसा करना असंभव भी नहीं है। जिस किसी भी दिन विज्ञान ने ये क्षमता हासिल कर ली उस दिन से मानव भी जेलिफ़िश की भांति एक अमर प्राणी हो जायेगा।

क्या वर्तमान में मनुष्य के अंदर कुछ ऐसा गुण है?

हम मानवों में कुछ हद तक रिजनरेशन के गुण विद्यमान हैं। शरीर के किसी अंदरूनी या बाहरी हिस्सों के कट जाने, घाव होने या फिर जल जाने की स्थिति में हमारा शरीर रिजनरेशन की प्रक्रिया द्वारा खुद को ठीक कर लेता है। हमारे हाथ और पैरों के उँगलियों के शीर्ष कटने पर दोबारा पैदा हो जाते हैं।

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