लोंगवा विलेज एक ऐसा गाँव है जिसके निवासी भोजन करने के लिए भारत आते हैं और सोने के लिए म्यांमार जाते हैं।
लोंगवा गाँव की जनजाति को हेड हन्टर्स को नाम से भी जाना जाता है। बताते हैं कि इस गाँव के कोन्याक जनजाति के लोग पहले अपने दुश्मनों को मारकर उनकी खोपड़ी अपने साथ घर ले जाते थे। इसके बाद उस खोपड़ी को अपने घर के बाहर दरवाजे पे लटका देते थे।

Here we will talk about Longwa village (Lungwa village) situated at the border of India and Myanmar. The people of Longwa village have dual country citizenship. 

Longwa Village एक ऐसा गाँव है जिसके निवासी भोजन करने के लिए भारत आते हैं और सोने के लिए म्यांमार जाते हैं। इस गाँव का जो ग्राम प्रधान है वही इस गाँव का राजा भी है। जितना आश्चर्य इस Lungwa Village के बारे में जानकर होती है उतना ही आश्चर्यजनक यहाँ का ग्राम प्रधान भी है।

आगे हम लोंगवा विलेज के इस रहस्य के बारे में और वहां के ग्राम प्रधान के बारे में विस्तार से जानेंगे।

कहाँ स्थित है यह Longwa Village ?

भारत और म्यांमार के बॉर्डर पर लोंगवा विलेज (Lungwa Village) स्थित है। वैसे यह गाँव भारत के नागालैंड राज्य के मोन जिले के अंतर्गत आता है। लोंगवा गाँव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस गाँव का आधा हिस्सा भारत में पड़ता है और आधा हिस्सा म्यांमार में।

यहाँ के कुछ घर तो ऐसे हैं जो भारत और म्यांमार के बॉर्डर पर स्थित हैं यानि कि आधा घर भारत में और आधा घर म्यांमार में पड़ता है। इसीलिए लोंगवा गाँव के बारे में कहा जाता है कि यहाँ के लोग खाते म्यांमार में हैं और सोते भारत में

Longwa Village के ग्राम प्रधान यानि कि वहां के राजा के घर के बीच से भी इन दोनों देशों की सीमा रेखा गुजरती है। इसलिए वहां का राजा भी खाता भारत में और सोता म्यांमार में है।

Longwa Village के बारे में कुछ इंटरेस्टिंग फैक्ट्स

lungwa village

1.  लोंगवा गाँव के लोगों को दोहरी नागरिकता मिली हुई है। यानि कि लोंगवा विलेज के लोगों को भारत से म्यांमार और म्यांमार से भारत आने-जाने के लिए किसी वीजा या पासपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ती है। लोंगवा विलेज के कुछ लोग तो म्यांमार की सेना में भर्ती हैं।

2. लोंगवा विलेज का ग्राम प्रधान ही वहां का राजा है। यह राजा कोन्याक जनजाति का है जिसका नाम नगोवांग है। नागोवांग के अधिकार क्षेत्र में कुल 75 गाँव आते हैं। इनमें से कुछ गाँव म्यांमार में पड़ते हैं और कुछ गाँव भारत के नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में।

3. Longwa Village के राजा का परिवार बहुत बड़ा है। वहां के राजा नागोवांग की कुल 60 बीवियां हैं जो इस गाँव की दूसरी विशेषता है।

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4. लोंगवा गाँव की जनजाति को हेड हन्टर्स (Head Hunters) को नाम से भी जाना जाता है। बताते हैं कि इस गाँव के कोन्याक जनजाति के लोग पहले अपने दुश्मनों को मारकर उनकी खोपड़ी अपने साथ घर ले जाते थे। इसके बाद उस खोपड़ी को अपने घर के बाहर दरवाजे पे लटका देते थे। यह प्रथा हेड हंटिंग (Head Hunting) कहलाती थी।

1960 के दशक तक हेड हंटिंग वहां की लोकप्रिय प्रथा थी। लोकप्रिय इसलिए कि जिसके घर के दरवाजे पर जितनी ज्यादे मानव खोपड़ियाँ लटकी रहती थीं वह घर उतना ही ज्यादे सम्मानित समझा जाता था। खैर, अब हेड हंटिंग की यह प्रथा बिलकुल बंद हो चुकी है।

लेकिन आज भी इस कोन्याक जनजाति के घरों के दरवाजे पर पुश्तैनी मानव खोपड़ियाँ लटकी हुई हैं जिसे देखकर कोई भी डर जाएगा।

5. Longwa Village के लोगों कोअफीम की लत है। लोंगवा गाँव में अफीम की खेती तो नहीं होती है लेकिन वे लोग म्यांमार से तस्करी करके अफीम लाते हैं।

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