इस गाँव के सभी भाई एक ही बीवी से काम चलाते हैं

Places Where Women Have More Than One Husband

Here we will talk about Mankhera Village of Rajsthan, a such indian Places Where Women Have More Than One Husband at a time. 

आज हम भारत के एक ऐसे गाँव के बारे में बात करने वाले हैं जहाँ सभी भाई मिलकर एक ही बीवी से काम चलाते हैं। इस गाँव की सबसे बड़ी बात यह है कि यहां इसे गलत नजरिये से नहीं देखा जाता है। यहां ऐसे रिश्ते को सम्मान के नजर से देखा जाता है।

 इस गाँव की इस विशेषता के बारे में सुनकर एक बार तो हर कोई चौंक जाता है। बात भी तो चौंकाने वाली है, कहीं कोई पति अपनी पत्नी को अपने भाइयों के बीच शेयर करता है भला? लेकिन अपने भारत के इस गाँव में तो यही परंपरा वर्षों से चली आ है।

इस गाँव की इस परंपरा के बारे में सुनकर महाभारत काल की द्रोपदी की याद ताजा हो जाती है जब पांचो पांडव भाई मिलकर एक ही पत्नी शेयर किए थे। तब वह महाभारत काल की बात थी लेकिन आज यह भारत काल की बात है।

कौन है वह गाँव (Places Where Women Have More Than One Husband)

राजस्थान के अलवर जिले में एक गाँव पड़ता है जिसका नाम मनखेरा है। यह अलवर से लगभग 66 किलोमीटर दूर पड़ता है। इस गाँव में अगर कोई 2 या तीन भाई है तो सिर्फ एक बड़े भाई की शादी कर दी जाती है और बाकि के भाई भी उसी बड़े भाई की बीवी से अपना काम चलाते हैं।

वह औरत चाहकर भी इस अनुचित रिश्ते का विरोध नहीं कर पाती। अगर वह इस अनुचित रिश्ते का विरोध करना चाहे तो उसे प्रताड़ित किया जाता है।

अगर किसी घर में दो या दो से अधिक भाई हैं तो उस घर में बड़े भाई से ब्याही जाने वाली लड़की को यह बात अब पहले से ही पता रहती है कि उसके होने वाले देवर भी उसका सेकंड हस्बैंड होंगे। इसीलिए उस गाँव में ब्याही जाने वाली लड़कियां अब इस अनुचित रिश्ते का विरोध नहीं करती हैं।

मनखेरा गाँव में क्यों शुरू हुई यह परंपरा ?

दरअसल मनखेरा गाँव की आमदनी का मुख्य स्रोत खेती है। यहाँ के किसानों के खेत छोटे बड़े टुकड़ों में बंटे हुए हैं। परिवार बढ़ने के साथ भाइयों के बीच बंटवारे होने पर खेतों के और भी छोटे छोटे टुकड़े हो जाते हैं। खेतों के और ज्यादे छोटे टुकड़े न हों इसलिए मनखेरा गाँव के पूर्वजों ने इस प्रथा की शुरुआत की थी।

अब एक ही भाई की पत्नी पर सभी भाइयों के निर्भर रहने से परिवार भी ज्यादा बड़ा नहीं होता है और बाद में भाइयों के बीच जमीन बंटवारे की नौबत भी नहीं आती है। ऐसा इसलिए भी कि सभी बच्चों की माँ एक ही होती है और सभी भाइयों का उन बच्चों पर सामान अधीकार होता है। हां, पिता की जगह बड़े भाई का नाम लिखा जाता है।

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इस प्रथा का एक दूसरा कारण यह भी है कि मनखेरा गाँव और आस-पास के क्षेत्रों में स्त्री पुरुष के लिंगानुपात में भी बहुत अंतर है। वहां लड़कों का जन्मदर लड़कियों से ज्यादे है, जिसका मुख्य कारण लड़कियों की भ्रूण-हत्या है। लड़कियों की संख्या कम होने की वजह से वहां के कुछ लड़के कुंवारे ही रह जाते थे।

इसलिए वहां के पूर्वजों ने बहुत सोच विचारकर इस प्रथा की शुरुआत की जिससे एक तीर से कई निशाने साधे गए।

मनखेरा गाँव की विवाहित औरतों की नजर में इस प्रथा का महत्व 

वैसे तो कोई भी औरत सिर्फ एक ही पति चाहती है लेकिन मनखेरा गाँव की इन्हीं सब परिस्थितियों को देखते हुए वे खुद को इस प्रथा के अनुसार ढाल चुकी हैं। 

इस रिश्ते से उन्हें यह फायदा मिलता है कि सभी भाई मिलकर उस अकेली औरत की देख भाल करते हैं। परिवार में उसी औरत की ज्यादे चलती है और सभी भाई उसकी बात भी मानते हैं।

उस औरत को संपत्ति की हिस्सेदारी को लेकर कभी टेंशन नहीं होती क्योंकि सभी भाइयों द्वारा अर्जित की गई संपत्ति पर सिर्फ उसी औरत का अधिकार होता है।

नोट : मेरी नजर में मनखेरा गाँव (Places Where Women Have More Than One Husband) की यह प्रथा एक कुप्रथा है जिसे कभी भी अच्छा नहीं माना जा सकता है। वैसे नैतिकता और अनैतिकता बहुत हद तक समाज के ढांचे पर भी तो निर्भर करती है। एक प्रथा एक समाज के लिए नैतिक होती है तो वही दुसरे समाज के लिए अनैतिक भी हो सकती है।

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