यहां परंपरा के नाम पर नई-नवेली दुल्हनें सोती हैं गैर मर्दों के साथ

parna samuday ki bahu

It is educational article about Perna Samuday of Najafgadh area of Delhi.

एक सभ्य समाज में घर की बहु-बेटियों को घर की इज्जत समझा जाता है। बहु-बेटियों को घर की लक्ष्मी माना जाता है। लेकिन इसी सभ्य समाज के बीच एक ऐसा समुदाय है जो परंपरा के नाम पर अपनी खुबसुरत नई-नवेली बहुओं से वो काम कराता है जो काम एक पत्नी सिर्फ अपने पति के साथ करती है। इस समुदाय के लोगों की नजर में गैर मर्दों के साथ अपनी बहुओं द्वारा रातें रंगीन करना उनके परम्परा का एक अनिवार्य हिस्सा है।

इस समुदाय के लोग कौन हैं? ये कहाँ रहते हैं? इतनी गन्दी परम्परा का निर्वहन ये बेहिचक आज भी क्यों करते आ रहे हैं? इसके बारे में हम आगे विस्तार से बताने वाले हैं।

ये लोग “परना समुदाय” से आते हैं । ये दिल्ली के नजफगढ़ एरिया में रहते हैं। परना समुदाय के लोग आज भी बेहिचक अपनी इस पूरानी सदी-गली परम्परा का निर्वहन करते आ रहे हैं। इस समुदाय की हसीन बहुएं अधिकांशतः घुंघट में ही रहती हैं।

परना समुदाय (Perna Samuday) का इतिहास और वर्तमान स्थिति

इस परना समुदाय के लोग साल 1964 में राजस्थान से चलकर दिल्ली के नजफगढ़ एरिया में आकर बस गए थे और तभी से वे यहाँ रह रहे हैं। उन सभी का परिवार नजफगढ़ के प्रेमनगर बस्ती और धर्मशाला क्षेत्र में बसा हुआ है।

parna samuday ki bahuwe

जब वे दिल्ली आए थे तब वे अपने पारम्परिक रिवाज का पालन करते हुए अपनी नई-नवेली बहुओं से धंधा कराते थे। लेकिन आज इतना लम्बा समय बिट जाने के बाद भी उनके इस घिनौनी परम्परा में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है। आज भी परना समुदाय की खुबसुरत बहुएं इस परम्परा का पालन करते हुए रोज गैर मर्दों के बिस्तर गरम कर रही हैं ।

इस परना समुदाय की लड़कियां बहुत खुबसुरत होती हैं। ये लड़कियां महज प्राइमरी स्कूल तक की ही शिक्षा ले पाती हैं।

Perna Samuday की लड़कियों का विवाह

परना समुदाय लडकियों की शादी 12 से 15 वर्ष की उम्र में अपने ही समुदाय के किसी योग्य लड़के से कर दी जाती है। लेकिन इन लड़कियों की शादी करने से पहले लड़के वाले पक्ष से एक मोटी रकम ली जाती है। लड़के की योग्यता शादी के बदले लड़की को दी जाने वाली रकम से तय होती है।

शादी के बदले लड़की के बाप को लड़के पक्ष से मिलने वाली रकम, लड़की की खूबसूरती और उसके आकर्षक शारीरिक बनावट के आधार पे तय होती है। यानि कि, जो लड़की जितनी सुंदर होगी उसके बाप को उतनी ही मोटी रकम मिलेगी।

परना समुदाय की लड़कियों का विवाह के बाद का जीवन

 

daughter in law of parna samuday

इस परना समुदाय की लड़कियों का असली और दोहरा जीवन उनके शादी के बाद ही शुरू हो जाता है। असली जीवन इसलिए क्योंकि उनके जीवन का मुख्य मकसद ही होता है गैर मर्दों की रातें रंगीन करना। दोहरा जीवन इसलिए क्योंकि घर और बाहर की दोनों जिम्मेदारियां इन्हीं को निभानी होती है। बोले तो पैसे भी कमाना और घर-गृहस्थी भी संभालना। इनके मर्द निठल्ले और कामचोर होते हैं।

शादी के तुरंत बाद ही इन नई-नवेली दुल्हनों को अपने पारम्परिक देह व्यापर का काम शुरू करना होता है। कभी-कभार पहला बच्चा जनने के बाद इन्हें इस धंधे में उतरना होता है। मजे की बात यह होती है कि इन दुल्हनों के ग्राहक उनके पति ही ढूंढते हैं।

इस परम्परा का सबसे अमानवीय और घटिया पहलु ये होता है कि जो बहु अगर इस पारम्परिक धंधे में न उतरना चाहे तो इसे अपनी परम्परा का अपमान समझ कर उसे मारा पिटा जाता है। उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। आखिरकार थक-हारकर उन्हें भी इस धंधे में उतरना ही पड़ता है।

Perna Samuday की  हसीन बहुओं की दिनचर्या

ये बहुएं दिन में घर का काम करती हैं और रात में अपने ग्राहकों के तलाश में इधर-उधर भटकती हैं। इस समुदाय की एक बहु ने बतलाया कि प्रतिदिन वे कम से कम 5 ग्राहकों की रातें रंगीन करती हैं।

ग्राहकों की तलाश में वे रात के अँधेरे में घर से निकल जाति हैं और साड़ी रात अलग-अलग ग्राहकों के साथ सोती हैं। ग्राहकों को खुश करने के बाद वे वापस अपने घर को लौट आती हैं। फिर वे घर का सारा काम करतीहैं जैसे कि खाना बनाना, बच्चे संभालना और पति की डिमांड पूरी करना, इत्यादि।

परना समुदाय की बहुओं के जीवन में बदलाव की आशा

कुछ NGO और समाज सुधारक लोग इन लड़कियों को इस गन्दगी से बाहर निकलने का प्रयास कर रही हैं।

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